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केजीएमयू में कैंसर दवा घोटाला कैसे हुआ करोड़ों का बड़ा वित्तीय फर्जीवाड़ा

Satyakhabarindia

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के यूरोलॉजी विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और दवा घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में कैंसर की महंगी दवाओं की खरीद और खपत में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। आरोप है कि मरीजों के इलाज के नाम पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। मामले के सामने आते ही KGMU प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल जांच शुरू कर दी गई।

मृत मरीजों के नाम पर दवाओं की फर्जी खपत

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कई दिवंगत मरीजों के नाम पर दवाओं की खपत दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार जिन मरीजों की मृत्यु दिसंबर में हो चुकी थी, उनके नाम पर जनवरी से अप्रैल तक दवाएं जारी दिखाई गईं। रजिस्टर में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं जहां किडनी के मरीजों को कैंसर मरीज दिखाकर महंगी दवाओं का बिल तैयार किया गया। करीब 40 मरीजों के रिकॉर्ड में इस तरह की गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।

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प्रशासन की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप

मामले के उजागर होने के बाद KGMU प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार कर्मचारियों पर सख्त कदम उठाए हैं। तीन संविदाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है जबकि एक स्थायी कर्मचारी चीफ फार्मासिस्ट अरशद वसी के खिलाफ निलंबन और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा संबंधित एजेंसी से वित्तीय नुकसान की वसूली करने की भी तैयारी है। विभागाध्यक्ष को भी पद से हटा दिया गया है।

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प्रारंभिक जांच में 2 करोड़ से अधिक के घोटाले की आशंका

प्रशासन की अंतरिम जांच रिपोर्ट में अब तक करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका जताई गई है। यह राशि आगे जांच के बाद और बढ़ भी सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को पत्र भेजकर विस्तृत जांच और एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। अब पुलिस और प्रशासनिक जांच मिलकर पूरे नेटवर्क और शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेंगे।

आगे की जांच में और बड़े खुलासों की संभावना

अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है उनमें प्रकाश सिंह, हेमंत श्रीवास्तव, सचिन तिवारी और अरशद वसी शामिल हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ घोटाले की पूरी रकम और अन्य जिम्मेदार लोगों के नाम सामने आने की संभावना है। प्रशासन अब पूरे सिस्टम की गहन ऑडिट कराने की तैयारी में है।

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